8 जून 2021 - 18:44
ईरान के ख़िलाफ़ उत्तेजक कार्यवाहियां करके अपने राजनैतिक कैरियर को तूल देना चाहते हैं नेतनयाहू? ईरान ने बदला लेने की क्या रणनीति बनाई है?

पर्यवेक्षकों के बीच इस बात पर सहमति है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू आसानी से सत्ता नहीं छोड़ेंगे। नेतनयाहू अपने विरोधियों नफ़ताली बेनेट और याईर लबीद को सत्ता से दूर रखने के लिए ईरान के साथ कोई बड़ा टकराव शुरू कर देने की कोशिश में ज़रूर व्यस्त हैं ताकि इस टकराव के नतीजे में हालात उथल पुथल हो जाएं और विरोधियों को गद्दी पर विराजमान होने का मौक़ा न मिले।

नेतनयाहू कुछ ही दिन पहले साफ़ साफ़ कह चुके हैं कि अगर अमरीका से बिगाड़ और ईरान से युद्ध के बीच किसी एक विकल्प का चयन करना पड़े तो वह निश्चित रूप से दूसरे विकल्प को चुनेंगे।

अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन इस ख़तरे को बहुत जल्द भांप गए इसीलिए उन्होंने इस्राईली युद्ध मंत्री बेनी गांट्स को आनन फ़ानन में वाशिंग्टन बुलाया ताकि नेतनयाहू के ख़तरनाक इरादों को नाकाम बना दें। इस यात्रा के असली मक़सद को छिपाने के लिए कहा गया कि गांट्स का सफ़र इस्राईली मिसाइल ढाल व्यवस्था आयरन डोम को अधिक कारगर बनाने के तरीक़ों पर बात करने के लिए अंजाम पाया क्योंकि फ़िलिस्तीनियों के हालिया मिसाइल हमलों से आयरन डोम को भारी नुक़सान पहुंच गया है।

तीन इशारें हैं जिनसे पता चलता है कि ईरान के ख़िलाफ़ इस्राईल की उत्तेजक कार्यवाहियों से अमरीकी प्रशासन की चिंता बहुत बढ़ गई है।

एक तो ईरान के किरमानशाह के ज़रंद में स्टील के कारख़ाने में लगने वाली आग है। इससे पहले एक धमाका हुआ था।

दूसरी घटना ईरान के युद्धपोत में धमाके के बाद लगने वाली आग है जिसके नतीजे में यह युद्धपोत ओमान सागर में डूब गया।

तीसरी घटना तेहरान की विशालकाय रिफ़ाइनरी के 18 बड़े भंडारों में आग लग जाना है। आग बुझाने में दो दिन लग गए।

तीनों घटनाओं में एक बात समान है कि धमाके के नतीजे में आग लगी। अभी यह नहीं पता चल सका है कि धमाके क्यों हुए।

ईरानी प्रशासन ने इन घटनाओं के बारे में किसी पर आरोप लगाने और बदले की धमकी देने से परहेज़ किया है।

ईरान का सैनिक और सिविल नेतृत्व बख़ूबी यह बात महसूस कर रहा है कि इन घटनाओं के पीछे दुष्ट इरादे काम कर रहे हैं जिनका मक़सद ईरान को युद्ध में घसीटना है ताकि इस तरह नेतनयाहू की योजना पूरी हो जाए।

कुछ कारणों से आने वाले तीन सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

एक तो यह कि सोमवार को वियेना में ईरान और बड़ी शक्तियों के बीच परमाणु वार्ता का आख़िरी दौर आयोजित हो रहा है जिसे निर्णायक दौर कहा जा रहा है और इसमें महत्वपूर्ण सहमति होने की संभावना है।

दूसरे आगामी 18 जून को ईरान में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। चुनाव में हुज्जतुल इस्लाम इब्राहीम रईसी की विजय की अधिक संभावना है जिनका संबंध सिद्धांतवादी धड़े से है।

हमें यह लगता है कि इस समय तो शायद ईरान तत्काल जवाबी कार्यवाही न करे लेकिन आने वाले दिनों में ईरान गिन गिन कर अपना बदला ज़रूर लेगा। हम यह बात इसलिए कह रहे हैं कि इससे पहले भी ईरान इस्राईल से इस प्रकार के हमलों का बदला ले चुका है। रमला शहर में इस्राईल के मिसाइलों के कारख़ाने में धमाका, हैफ़ा बंदरगाह की रिफ़ाइनरी में धमाके के बाद भीषण आग, अल्लिद अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भीषण आग, हैफ़ा बंदरगाह में अमोनिया के भंडार में गैस का रिसाव। यह महत्पूर्ण उदाहरण हैं जिनके बारे में इस्राईली प्रशासन ने माना कि हमलों के नतीजे में यह घटनाएं हुई हैं और इनमें ईरान का हाथ होने की संभावना है।

इब्राहीम रईसी के चुनाव जीतने का मतलब यह होगा कि इस्राईल के हर हमले का ईरान तत्काल और ज़ोरदार बदला लेगा।

स्रोतः रायुल यौम